तुला राशि का नाम और चिह्न
तुला का अर्थ तराजू है, और चिह्न में तराजू थामे व्यापारी की आकृति बनती है। लैटिन का Libra भी तराजू के लिए है। यह सातवीं राशि है। इसे देवनागरी में तुला लिखा जाता है और अंग्रेज़ी में Libra।
तत्व, स्वभाव और स्वामी ग्रह
पारंपरिक वर्गीकरण में तुला वायु तत्व वाले समूह की सदस्य है, जिसमें तुला, मिथुन और कुंभ आती हैं, और चर स्वभाव के समूह की भी, जिसमें तुला, मेष, कर्क और मकर हैं। चर राशियाँ हर तीन राशियों के समूह की शुरुआत करती हैं: पहली, चौथी, सातवीं और दसवीं। वायु तत्व की राशियाँ तीसरी, सातवीं और ग्यारहवीं हैं। तत्व 120 अंश के अंतर पर बैठते हैं, जबकि स्वभाव हर तीसरी राशि पर लौट आता है।
तुला का स्वामी ग्रह शुक्र है। शुक्र वृषभ का भी स्वामी है। तुला का स्वामी भी शुक्र है। दूरबीन से देखने पर उसमें चंद्रमा जैसी कलाएँ दिखती हैं, और सूर्य के सापेक्ष आकाश में वह हर 584 दिन बाद उसी स्थान पर लौटता है।
तुला राशि के नक्षत्र
निरयन राशिचक्र में तुला का विस्तार 180 अंश से 210 अंश तक है, जिसमें नौ चरण समाते हैं और इसलिए सवा दो नक्षत्र। इस दायरे में पड़ने वाले नक्षत्र ये हैं: चित्रा (चरण 3 से 4); स्वाति (चारों चरण); विशाखा (चरण 1 से 3)। इनके स्वामी ग्रह क्रम से मंगल, राहु और गुरु हैं। तुला 180 अंश पर शुरू होती है, जो निरयन वृत्त का ठीक आधा बिंदु है। इसमें स्वाति और विशाखा का अधिकांश भाग आता है। इसकी सम्मुख राशि मेष है।
चंद्रमा को एक राशि से गुज़रने में करीब ढाई दिन से कुछ कम लगते हैं, यानी हर माह चंद्रमा इतने समय के लिए तुला में रहता है। उसका नक्षत्र इस जानकारी को और सीमित कर देता है। जन्म के समय दोनों जानने के लिए नक्षत्र खोजें देखें।
चंद्र राशि तुला और सूर्य राशि तुला
चंद्र राशि जन्म के समय चंद्रमा की निरयन स्थिति गिनती है, जबकि पश्चिमी सूर्य राशि सूर्य की सायन स्थिति। दोनों राशिचक्रों के बीच अयनांश (लाहिड़ी) का अंतर है, जो 2026 में करीब 24 अंश 13 कला है।
तुला के लिए यह तारीख़ों में दिख जाता है। 2026 में सूर्य निरयन तुला में 17 अक्टूबर 2026 से 16 नवंबर 2026 तक रहता है, और पश्चिमी Libra में 23 सितंबर 2026 से 23 अक्टूबर 2026 तक। इन दोनों अवधियों के केवल लगभग 6 दिन आपस में मिलते हैं। इसलिए पश्चिमी सूर्य राशि Libra वाले अधिकतर लोगों की वैदिक सूर्य राशि कन्या होती है, और चंद्र राशि बारह में से कोई भी। चंद्र राशि हर दो-तीन दिन में बदलती है, इसलिए चंद्र राशि कैलकुलेटर जन्म का समय और स्थान पूछता है।
तुला के चरण और नवांश
नवांश में हर चरण एक राशि का होता है। तुला के नौ चरण नौ क्रमिक राशियाँ लेते हैं: पहला चरण तुला से आरंभ होता है और नौवाँ मिथुन पर आता है। अगली राशि वृश्चिक का पहला चरण कर्क से शुरू होता है। यही कारण है कि नवांश (D9) कुंडली में एक ही राशि के अलग-अलग अंश अलग नवांश राशि में पड़ते हैं।
तुला से गिनती
जब किसी ग्रह को चंद्रमा से इतनी राशि दूर बताया जाता है, तो गिनती चंद्र राशि से ही शुरू होती है। तुला के लिए यह क्रम है: दूसरी राशि वृश्चिक; तीसरी राशि धनु; चौथी राशि मकर; पाँचवीं राशि कुंभ; छठी राशि मीन; सातवीं राशि मेष; आठवीं राशि वृषभ; नौवीं राशि मिथुन; दसवीं राशि कर्क; ग्यारहवीं राशि सिंह; बारहवीं राशि कन्या। सामने की राशि मेष पड़ती है, और कुंभ तथा मिथुन त्रिकोण पूरा करती हैं।
तुला संक्रांति: सूर्य का तुला में प्रवेश
सूर्य अक्टूबर के मध्य में तुला में प्रवेश करता है। इसी दिन तमिल पंचांग का ऐप्पसि माह और मलयालम पंचांग का तुलाम माह शुरू होता है।
गणना लाहिड़ी अयनांश और संपूर्ण राशि भाव (whole sign) पद्धति से की गई है; हर सेटिंग विधि पेज पर देखी जा सकती है। अंतिम जाँच 2026-10-04।