कर्क राशि (Cancer): चंद्र राशि, स्वामी ग्रह और नक्षत्र

कर्क बारह राशियों में चौथी राशि है, जिसे अंग्रेज़ी में Cancer कहते हैं। निरयन राशिचक्र में यह 90 से 120 अंश तक फैली है। यह जल तत्व की चर राशि है, इसका स्वामी ग्रह चंद्रमा है, और पुनर्वसु, पुष्य और आश्लेषा नक्षत्र इसके भीतर आते हैं।

संस्कृत नाम
कर्क
अंग्रेज़ी नाम
Cancer
क्रम
बारह में चौथी
निरयन विस्तार
90 से 120 अंश
तत्व और स्वभाव
जल, चर
स्वामी ग्रह
चंद्रमा
नक्षत्र
पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा
2026 में सूर्य इस राशि में
16 जुलाई 2026 से 17 अगस्त 2026

कर्क राशि का नाम और चिह्न

कर्क का अर्थ केकड़ा है, और चिह्न में ऊपर उठे पंजों वाला केकड़ा बनाया जाता है। लैटिन का Cancer भी उसी जीव का नाम है। यह चौथी राशि है। इसे देवनागरी में कर्क लिखा जाता है और अंग्रेज़ी में Cancer।

तत्व, स्वभाव और स्वामी ग्रह

कर्क जल तत्व की और चर स्वभाव की राशि है। चार तत्वों में से हर एक की तीन राशियाँ होती हैं, जो एक दूसरे से 120 अंश की दूरी पर हैं, और जल तत्व में कर्क के साथ वृश्चिक और मीन आती हैं। जल तत्व की राशियाँ चौथी, आठवीं और बारहवीं हैं। स्वभाव के तीन भेद चक्र में बार-बार दोहराए जाते हैं, और चर स्वभाव में कर्क के साथ मेष, तुला और मकर हैं। चर राशियाँ हर तीन राशियों के समूह की शुरुआत करती हैं: पहली, चौथी, सातवीं और दसवीं। ये राशियों को छाँटने की पारंपरिक श्रेणियाँ हैं।

कर्क का स्वामी ग्रह चंद्रमा है। कर्क अकेली राशि है जिसका स्वामी चंद्रमा है। चंद्रमा तारों के सापेक्ष पृथ्वी का एक चक्कर लगभग 27.3 दिन में लगाता है। स्वामी ग्रहों में केवल वही इतना तेज़ चलता है कि हर दो-तीन दिन में राशि बदल दे, और वह केवल इसी एक राशि का स्वामी है।

कर्क राशि के नक्षत्र

कर्क निरयन भोगांश 90 से 120 अंश तक फैली है। यह ठीक नौ चरणों के बराबर है, यानी सवा दो नक्षत्र। जिन नक्षत्रों का कोई भाग इस राशि में आता है, वे हैं: पुनर्वसु (केवल चरण 4); पुष्य (चारों चरण); आश्लेषा (चारों चरण)। इनके स्वामी ग्रह क्रम से गुरु, शनि और बुध हैं। कर्क अकेली राशि है जिसका स्वामी चंद्रमा है। इसमें पुष्य नक्षत्र का तारा-समूह और धुंधला मधुमक्खी-छत्ता (बीहाइव) तारा-गुच्छ आता है। इसकी सम्मुख राशि मकर है।

चंद्रमा एक राशि पार करने में लगभग सवा दो से ढाई दिन लगाता है, इसलिए हर महीने चंद्रमा उतने ही समय कर्क में रहता है। उस बीच चंद्रमा किस नक्षत्र में है, इससे स्थिति और बारीकी से पता चलती है। अपने जन्म के लिए दोनों देखने के लिए नक्षत्र खोजें का उपयोग करें।

चंद्र राशि कर्क और सूर्य राशि कर्क

वैदिक चंद्र राशि वह निरयन राशि है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था। पश्चिमी सूर्य राशि वह सायन राशि है जिसमें उस समय सूर्य था। दोनों अलग पैमाने हैं, और 2026 में निरयन राशिचक्र सायन से लगभग 24 अंश 13 कला पीछे है।

कर्क के लिए यह तारीख़ों में दिख जाता है। 2026 में सूर्य निरयन कर्क में 16 जुलाई 2026 से 17 अगस्त 2026 तक रहता है, और पश्चिमी Cancer में 21 जून 2026 से 23 जुलाई 2026 तक। इन दोनों अवधियों के केवल लगभग 7 दिन आपस में मिलते हैं। इसलिए पश्चिमी सूर्य राशि Cancer वाले अधिकतर लोगों की वैदिक सूर्य राशि मिथुन होती है, और चंद्र राशि बारह में से कोई भी। चंद्र राशि हर दो-तीन दिन में बदलती है, इसलिए चंद्र राशि कैलकुलेटर जन्म का समय और स्थान पूछता है।

कर्क के चरण और नवांश

कर्क के भीतर के नौ चरणों को लगातार नौ नवांश राशियाँ मिलती हैं। क्रम कर्क से शुरू होकर मीन पर रुकता है, और अगली राशि सिंह में फिर मेष से नई गिनती उठती है। इसी तरह राशि का हर अंश नवांश (D9) कुंडली की किसी एक राशि में पड़ता है, जिसे बारीक अध्ययन के लिए देखा जाता है।

कर्क से गिनती

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति अक्सर चंद्र राशि से कितनी राशि दूर है, इस तरह गिनी जाती है, जिसे चंद्र से भाव (चंद्र लग्न से गिनती) कहते हैं। चंद्र राशि कर्क हो तो गिनती यह बनती है: दूसरी राशि सिंह; तीसरी राशि कन्या; चौथी राशि तुला; पाँचवीं राशि वृश्चिक; छठी राशि धनु; सातवीं राशि मकर; आठवीं राशि कुंभ; नौवीं राशि मीन; दसवीं राशि मेष; ग्यारहवीं राशि वृषभ; बारहवीं राशि मिथुन। कर्क की सम्मुख राशि मकर है, और उससे त्रिकोण बनाने वाली दो राशियाँ वृश्चिक तथा मीन हैं।

कर्क संक्रांति: सूर्य का कर्क में प्रवेश

सूर्य जुलाई के मध्य में कर्क में प्रवेश करता है। इसी दिन तमिल पंचांग का आडि माह और मलयालम पंचांग का कर्किटकम माह आरंभ होता है। परंपरा में इसे दक्षिणायन, यानी वर्ष के उस आधे भाग की शुरुआत गिना जाता है जिसमें सूर्य दक्षिण की ओर बढ़ता है।

गणना लाहिड़ी अयनांश और संपूर्ण राशि भाव (whole sign) पद्धति से की गई है; हर सेटिंग विधि पेज पर देखी जा सकती है। अंतिम जाँच 2026-10-04।

लोग क्या पूछते हैं

वैदिक ज्योतिष में Cancer को क्या कहते हैं?

Cancer को कर्क राशि कहा जाता है। यह चौथी राशि है और इसका स्वामी ग्रह चंद्रमा है।

कर्क राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?

पुनर्वसु, पुष्य और आश्लेषा। पुनर्वसु और आश्लेषा का कुछ भाग पड़ोसी राशि में भी जा सकता है, क्योंकि कर्क में ठीक नौ चरण होते हैं।

क्या वैदिक चंद्र राशि कर्क और पश्चिमी सूर्य राशि Cancer एक ही हैं?

नहीं। एक में निरयन चंद्रमा गिना जाता है और दूसरी में सायन सूर्य, और 2026 में दोनों राशिचक्रों के बीच लगभग 24 अंश 13 कला का अंतर है। दोनों का मेल केवल संयोग से होता है।

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