कुंभ राशि का नाम और चिह्न
कुंभ का अर्थ घड़ा है, और चिह्न में जल का घड़ा उठाए एक व्यक्ति बनाया जाता है। लैटिन का Aquarius जल ढोने वाले को कहता है। यह ग्यारहवीं राशि है। इसे देवनागरी में कुंभ लिखा जाता है और अंग्रेज़ी में Aquarius।
तत्व, स्वभाव और स्वामी ग्रह
पारंपरिक वर्गीकरण में कुंभ वायु तत्व वाले समूह की सदस्य है, जिसमें कुंभ, मिथुन और तुला आती हैं, और स्थिर स्वभाव के समूह की भी, जिसमें कुंभ, वृषभ, सिंह और वृश्चिक हैं। स्थिर राशियाँ हर तीन राशियों के समूह के बीच में आती हैं: दूसरी, पाँचवीं, आठवीं और ग्यारहवीं। वायु तत्व की राशियाँ तीसरी, सातवीं और ग्यारहवीं हैं। तत्व 120 अंश के अंतर पर बैठते हैं, जबकि स्वभाव हर तीसरी राशि पर लौट आता है।
कुंभ का स्वामी ग्रह शनि है। शनि मकर का भी स्वामी है। कुंभ का स्वामी भी शनि है। उसके छल्ले मुख्यतः जल की बर्फ़ से बने हैं, बहुत चौड़े हैं, पर कई जगह केवल लगभग दस मीटर मोटे हैं।
कुंभ राशि के नक्षत्र
निरयन राशिचक्र में कुंभ का विस्तार 300 अंश से 330 अंश तक है, जिसमें नौ चरण समाते हैं और इसलिए सवा दो नक्षत्र। इस दायरे में पड़ने वाले नक्षत्र ये हैं: धनिष्ठा (चरण 3 से 4); शतभिषा (चारों चरण); पूर्वा भाद्रपद (चरण 1 से 3)। इनके स्वामी ग्रह क्रम से मंगल, राहु और गुरु हैं। कुंभ में शतभिषा के धुंधले तारे आते हैं। यह मकर के बाद और मीन से ठीक पहले की राशि है। इसकी सम्मुख राशि सिंह है।
चंद्रमा एक राशि पार करने में लगभग सवा दो से ढाई दिन लगाता है, इसलिए हर महीने चंद्रमा उतने ही समय कुंभ में रहता है। उस बीच चंद्रमा किस नक्षत्र में है, इससे स्थिति और बारीकी से पता चलती है। अपने जन्म के लिए दोनों देखने के लिए नक्षत्र खोजें का उपयोग करें।
चंद्र राशि कुंभ और सूर्य राशि कुंभ
वैदिक चंद्र राशि वह निरयन राशि है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था। पश्चिमी सूर्य राशि वह सायन राशि है जिसमें उस समय सूर्य था। दोनों अलग पैमाने हैं, और 2026 में निरयन राशिचक्र सायन से लगभग 24 अंश 13 कला पीछे है।
कुंभ के लिए यह तारीख़ों में दिख जाता है। 2026 में सूर्य निरयन कुंभ में 13 फ़रवरी 2026 से 15 मार्च 2026 तक रहता है, और पश्चिमी Aquarius में 20 जनवरी 2026 से 18 फ़रवरी 2026 तक। इन दोनों अवधियों के केवल लगभग 5 दिन आपस में मिलते हैं। इसलिए पश्चिमी सूर्य राशि Aquarius वाले अधिकतर लोगों की वैदिक सूर्य राशि मकर होती है, और चंद्र राशि बारह में से कोई भी। चंद्र राशि हर दो-तीन दिन में बदलती है, इसलिए चंद्र राशि कैलकुलेटर जन्म का समय और स्थान पूछता है।
कुंभ के चरण और नवांश
कुंभ के भीतर के नौ चरणों को लगातार नौ नवांश राशियाँ मिलती हैं। क्रम तुला से शुरू होकर मिथुन पर रुकता है, और अगली राशि मीन में फिर कर्क से नई गिनती उठती है। इसी तरह राशि का हर अंश नवांश (D9) कुंडली की किसी एक राशि में पड़ता है, जिसे बारीक अध्ययन के लिए देखा जाता है।
कुंभ से गिनती
वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति अक्सर चंद्र राशि से कितनी राशि दूर है, इस तरह गिनी जाती है, जिसे चंद्र से भाव (चंद्र लग्न से गिनती) कहते हैं। चंद्र राशि कुंभ हो तो गिनती यह बनती है: दूसरी राशि मीन; तीसरी राशि मेष; चौथी राशि वृषभ; पाँचवीं राशि मिथुन; छठी राशि कर्क; सातवीं राशि सिंह; आठवीं राशि कन्या; नौवीं राशि तुला; दसवीं राशि वृश्चिक; ग्यारहवीं राशि धनु; बारहवीं राशि मकर। कुंभ की सम्मुख राशि सिंह है, और उससे त्रिकोण बनाने वाली दो राशियाँ मिथुन तथा तुला हैं।
कुंभ संक्रांति: सूर्य का कुंभ में प्रवेश
सूर्य फ़रवरी के मध्य में कुंभ में प्रवेश करता है। इसी दिन तमिल पंचांग का मासि माह और मलयालम पंचांग का कुंभम माह आरंभ होता है।
गणना लाहिड़ी अयनांश और संपूर्ण राशि भाव (whole sign) पद्धति से की गई है; हर सेटिंग विधि पेज पर देखी जा सकती है। अंतिम जाँच 2026-10-04।